हाजीपुर जिला

 

हाजीपुर जिला 25 डिग्री 29 मिनट और 26 डिग्री 1 मिनट उत्तरी अक्षांश और 85 डिग्री 4 मिनट और 85 डिग्री 31 मिनट पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है।

हाजीपुर जिला का प्रधान शहर हाजीपुर गंगा और गंडक के संगम के समीप 25 डिग्री 41 मिनट उत्तरी अक्षांश और 85 डिग्री 12 मिनट पूर्वी देशांतर पर बसा हुआ है । गंगा और गंडक के संगम पर तथा हरिहर क्षेत्र और पाटलिपुत्र के समीप होने के कारण यह स्थान सदा ही एक प्रमुख स्थान रहा है। रामायण में लिखा है कि विश्वामित्र के साथ जनकपुर जाते समय राम और लक्ष्मण गंगा पार करके यहां ठहरे थे। ठहरने का निश्चित स्थान कुछ लोग रामचुरा और कुछ लोग रामभद्र बताते हैं । शहर के पश्चिम रामचंद्र जी का एक मंदिर है।

वर्तमान हाजीपुर शहर 1345 और 1358 के बीच बंगाल के शासक समसुद्दीन इलियास का बसाया हुआ है । उसने यहां एक किला बनवाया था जिसकी दीवाल अभी भी देखने में आती है । कहते हैं कि यह शहर 20 मिल पूरब महनार तक और 4 मील पुत्र गदई सराय तक फैला हुआ था । बहुत दिनों तक यहां उत्तर बिहार की राजधानी थी और यहां का सूबेदार बंगाल के मुसलमान शासक के अधीन काम करता था। बादशाह अकबर और उसके विद्रोही बंगाल के सूबेदार के बीच यहां कई लड़ाइयां हुई। अकबर ने यहां के सुविधा दाऊद खां को परास्त कर यहां का किला तोप से उड़ा दिया । उसने उत्तर और दक्षिण बिहार को मिलाकर पटना में राजधानी कायम की। तब से इस स्थान का महत्व कम हो गया

 

हाजीपुर से 20 मील उत्तर पश्चिम बस आर नाम का एक गांव है लिपियों के संग राज्य की राजधानी वैशाली यही अस्थान समझी जाती है भगवान बुध यहां तीन बार आए थे पौधों की द्वितीय महासभा यही हुई थी और यह स्थान बहुत दिनों तक बौद्ध धर्म का एक मुख्य अड्डा रहा जैनियों के लिए भी वैशाली पवित्र भूमि रही है क्योंकि जैन धर्म के प्रवर्तक बुध देव के समकालीन भगवान महावीर की जन्मभूमि यही थी

लिपियों के स्मारक स्वरूप एक विशाल टीले के सिवा या और कुछ नहीं रह गया है इस टीले को स्थानीय लोग राजा विशाल का गढ़ कहते हैं जनरल कनिंघम ने 18 से 71 ईसवी में इस स्थान को देखकर लिखा था कि वैशाली के भग्नावशेष ओं में यहां एक उजाड़ किला और एक टूटा फुटा स्तूप है किसके पास विशाल वट वृक्ष है यहां चैत के महीने में एक बहुत बड़ा मेला लगता है

भाषण में बहुत सारे तालाब हैं एक तालाब का नाम वामन तलाब है यहां के लोग कहते हैं कि पुराण प्रसिद्ध राजा बलि यही हुए थे और यही वामन भगवान ने बलि के गर्व को नाश किया था बाजार के 3 मील उत्तर-पश्चिम में बकरा गांव से 1 मील दक्षिण पूरब कोल्हुआ नामा का स्थान में बहुत सचिन कालीन भग्नावशेष हैं इनमें एक पत्थर का स्तंभ एक टूटा फुटा स्तूप एक पुराना तालाब और कुछ पुराने मकानों का चिन्ह है

यह स्थान के विषय में चीनी यात्री व्हेन सांग ने लिखा की वैशाली के उत्तर पश्चिमी भाग में अशोक का बनवाया एक स्तूप और 50 60 फीट ऊंचा एक स्तंभ है जिस पर सिंह की मूर्ति बनी हुई है स्तंभ के दक्षिण में एक तालाब है जो भगवान बुध के यहां आने के अवसर पर उन्हीं के लिए खोदा गया था तालाब से कुछ पश्चिम एक दूसरा स्थित है जहां बंदरों ने भगवान बुध को मधु प्रदान किया था शराब के उत्तर पश्चिम कोने पर बंदर की एक मूर्ति बनी हुई है व्हेन सांग लिखते हैं यह चीजें अब देखने के काम में आती है तलाब को आजकल लोग रामकुंड बोलते हैं

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