शीतला माता मंदिर, पटना सिटी

कंकड़बाग-कुम्हरार रोड के पूरब में गांधी सेतु के नीचे से होते हुए शीतला माता का मंदिर स्थित है .यह हिन्दू देवी माँ दुर्गा का एक उपासना पीठ  के साथ साथ शक्ति पीठ भी माना जाता है।  इतिहासकारों के मुताबिक 2500 वर्ष पूर्व यहां कुआं एवं वर्तमान नवपिंडी थी जो छोटे मंदिर में स्थापित थी। एक समय तुलसी मंडी में कुआं की खुदाई के दौरान वर्तमान शीतला जी की मूर्ति खड़े रूप में प्राप्त हुई। छोटी एवं बड़ी पहाड़ी तथा तुलसी मंडी के लोगों ने विचार विमर्श कर मूर्ति (शीतला) की इसी स्थान पर प्राण प्रतिष्ठा करा दी। इसके पीछे एक कारण यह भी था कि ग्रामवासी पहले से ही वहां पूजा पाठ करते आ रहे थे। कुआं से प्राप्त शीतला माता की मूर्ति एवं नवपिंडी की सुचारू रूप से पूजा के लिए पुजारी को सौंपा गया।

मंदिर के मुख्य द्वार के पूरब में ही शीतला माता का मंदिर है। मंदिर के दरवाजे के पूरब एवं दक्षिण कोने पर शीतला माता की खड़ी मूर्ति है। शीतला माता के मूर्ति के दाहिने त्रिशूल तथा उसके दाहिने पिंडी रूप में योगिनी विराजमान है। शीतला माता की मूर्ति के बांये अंगार माता की छोटी मूर्ति है। दरवाजे के भीतर पिंडी रूप में सात शीतला, एक भैरव एवं एक गौरेया है जो गुम्बज के ठीक नीचे स्थापित है।

इस मंदिर से सटे पूरब में ही ऐतिहासिक अगमकुआं है। अगमकुआं के नाम से प्रसिद्ध इस कुएं की खुदाई सम्राट अशोक के काल 273-232 ईस्वी पूर्व में की गई थी. इस कुएं की खासियत यह है कि इतना पुराना कुआं होने के बाद भी यह कभी नहीं सूखता है. इस कुएं की एक और खासियत है, इसमें पानी का रंग बदलता रहता है. इस कुएं की गहराई के संबंध में पुरातत्व विभाग का कहना है कि ‘कुएं की गहराई लगभग 105 फ़ीट है’. इस कुएं की गहराई को देखते हुए इसका नाम “अगम कुआं” रखा गया है.

कहा जाता है कि इस कुएं के अन्दर 9 और कुएं हैं और सबसे अंत में एक तहखाना है. यहाँ सम्राट अशोक का खजाना था. इसे खजाना गृह भी कहा जाता है. खजाना गृह अशोक के साम्राज्य कुम्हरार से सुरंग के द्वारा जुड़ा हुआ था.

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